
तुम आए थे
जैसे किसी नई पहल की तरह,
धीरे से, बिना शोर किए,
मेरे दिल में उजाला रख गए।
जहाँ खामोशी थी, वहाँ बातों का मौसम आया,
जहाँ डर था, वहाँ यकीन आया।
तुम्हारी बातों ने सिखाया ,
कि शुरुआत भी कभी‑कभी इंसान के रूप में आती हैं।
अब जब भी सुबह कि पहली किरण निकलती है,
मैं सोचती हूँ कि ,
कितनी खूबसूरत थी वो पहल,
जिसका नाम तुम थे।
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